नूतन कुछ नहीं
बस विचार है
एक अदना सा
जो बन जाता है
वट वृक्ष सा
और जोड़ने लगता है
कई पुरानी
चीजों को
और हो जाता है
आविष्कार
एक नवीन
वस्तु का
एक सूक्ष्म सा विचार
बना देता है
छोटे छोटे से
पुराने
कलपुर्जों से
एक अद्भुत सौन्दर्य
वैसे ही जैसे
ईश्वर ने
पुरानी आत्मा ,
मिटटी , जल
अग्नि , वायु
से घढ़ दिया
है तुम्हे
देकर नए विचार
और उस से भी परे
मुझे दिया हुनर
परखने का
इस विचार को
प्रेम के
सानिध्य में
समझो
ईश्वर के इस विचार का
कोई
औचित्य नहीं था
जब तक
तुमसे प्रेम का
नूतन विचार
मेरे मन में ना होता
और
रह जाता तुम्हारा सौन्दर्य
अनसुना ,, अनकहा
अगर इस तरह
एक नए विचार की
उत्पत्ति के लिए
मैंने स्वयं को
ना जलाया होता
प्रेम की अग्नि में
और ना लिखा होता
आज तुम्हे
इस तरह
खुरच खुरच कर
अपने दिल पर ,,,,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
बस विचार है
एक अदना सा
जो बन जाता है
वट वृक्ष सा
और जोड़ने लगता है
कई पुरानी
चीजों को
और हो जाता है
आविष्कार
एक नवीन
वस्तु का
एक सूक्ष्म सा विचार
बना देता है
छोटे छोटे से
पुराने
कलपुर्जों से
एक अद्भुत सौन्दर्य
वैसे ही जैसे
ईश्वर ने
पुरानी आत्मा ,
मिटटी , जल
अग्नि , वायु
से घढ़ दिया
है तुम्हे
देकर नए विचार
और उस से भी परे
मुझे दिया हुनर
परखने का
इस विचार को
प्रेम के
सानिध्य में
समझो
ईश्वर के इस विचार का
कोई
औचित्य नहीं था
जब तक
तुमसे प्रेम का
नूतन विचार
मेरे मन में ना होता
और
रह जाता तुम्हारा सौन्दर्य
अनसुना ,, अनकहा
अगर इस तरह
एक नए विचार की
उत्पत्ति के लिए
मैंने स्वयं को
ना जलाया होता
प्रेम की अग्नि में
और ना लिखा होता
आज तुम्हे
इस तरह
खुरच खुरच कर
अपने दिल पर ,,,,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''