Thursday, January 20, 2011

मेरी है


सरल है सौम्य है मुझसी है मेरी है
वो सुन्दरता की मूरत है ,मेरी है

सजग है ,, सादगी में समाई है वो
विचारों का सुन्दर मंथन है ,मेरी है

अदभुत सौंदर्य की मलिका का वो
जो रूप सलोना रखती है , मेरी है

एक मनचाहा सा सपर्श है खुदा का
जो मुझे अपने मन में रखती है, मेरी है

सुलभ साधारण मधुरानी सी रंगत वाली
जो मनमंदिर की देवी है हमेशा, मेरी है

एक रूप है अनोखा मेरी आँखों में
जो ख्वाबों में रहती है मेरे , मेरी है ,, '' अजीत त्रिपाठी ''

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