सरल है सौम्य है मुझसी है मेरी है
वो सुन्दरता की मूरत है ,मेरी है
सजग है ,, सादगी में समाई है वो
विचारों का सुन्दर मंथन है ,मेरी है
अदभुत सौंदर्य की मलिका का वो
जो रूप सलोना रखती है , मेरी है
एक मनचाहा सा सपर्श है खुदा का
जो मुझे अपने मन में रखती है, मेरी है
सुलभ साधारण मधुरानी सी रंगत वाली
जो मनमंदिर की देवी है हमेशा, मेरी है
एक रूप है अनोखा मेरी आँखों में
जो ख्वाबों में रहती है मेरे , मेरी है ,, '' अजीत त्रिपाठी ''
वो सुन्दरता की मूरत है ,मेरी है
सजग है ,, सादगी में समाई है वो
विचारों का सुन्दर मंथन है ,मेरी है
अदभुत सौंदर्य की मलिका का वो
जो रूप सलोना रखती है , मेरी है
एक मनचाहा सा सपर्श है खुदा का
जो मुझे अपने मन में रखती है, मेरी है
सुलभ साधारण मधुरानी सी रंगत वाली
जो मनमंदिर की देवी है हमेशा, मेरी है
एक रूप है अनोखा मेरी आँखों में
जो ख्वाबों में रहती है मेरे , मेरी है ,, '' अजीत त्रिपाठी ''
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