Sunday, February 26, 2012
शुभ विवाह
स्वतंत्र
स्वतंत्र होना चाहती हूँ
तुमसे
और तुम्हारे इस भाव से
की सिर्फ तुम्हारी हूँ
मेरा भी जीवन है
अपनी सोच है
अपनी इक्षाएं हैं
नहीं जी सकती मै
सिर्फ इस से की ,,,
सिर्फ तुम्हारी रहूँ
मुझे भी चाहिए
स्वतंत्रता
इस बात की
की जी सकूँ
जैसे जहाँ चाहूँ
घूम सकूँ
कहीं भी
किसी के भी साथ
ये अधिकार है मेरा ..
पर सुना नहीं तुमने
मै कहना चाहता था
की स्वतंत्रता ,,
सिर्फ स्वतंत्र होने का भाव नहीं
वरन जिम्मेदारी है
की ना हो किसी को द्वेष ,,
और ये कहना मेरा की
सिर्फ मेरी रहो
गलत भी नहीं
हर व्यक्ति चाहता है
की पूरा रहे वो
और तुम चली गई तो
मै तो अधुरा रह जाऊँगा मै ,,,
पर नहीं मानी तुम
मुझे अलग कर खुद से
तुमने चुना
स्वातंत्र्य को
जैसा की तुम चाहती थी
और कुछ दिनों में
तुमने समझा भी दिया मुझे
की है
तुम्हारे लिए
स्वंत्र होने का मतलब
मुझे यूँ ही अकेला छोड़कर
किसी और के साथ करना
खुद का
शुभ विवाह ,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
Monday, February 13, 2012
अंतिम प्रणाम
जब की नहीं बचा है
हमारे बीच
तुम्हे होने लगी है
परेशानी
मेरी बात से
मेरे होने से
तो क्या रह जाता है
औचित्य
मेरे होने का
आखिर
तुम्हारे सिवा
कुछ है भी तो नहीं
मेरे पास
और जो था
वो छोड़ चूका हूँ मै
तुम्हारे लिए
बहुत पहले
तो बस
और नहीं
इस
नीरस,,,
निर्वात,,
जिंदगी का साथ
तो जा रहा हूँ
आज
सब छोड़कर
बस स्वीकार करो
मेरा
अंतिम प्रणाम
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