बहुत हुआ
ये प्रणय निवेदन
और ये करुण रुदन
तुम्हारी बेरुखी पर
यूँ मौन रहकर
स्वीकृति का भाव भी
तब दिखे
जब रूह के और पास
आ जाऊं मै
या तुम लग जाओ
छतनार सी
मेरे सीने पर
और आ जाओ
मेरी रूह के करीब
शायद तब दिख जाएँ
भाव अनकहे से
लिपटे हुए
तुम्हारे बालों से
या सिमटते हुए
तुम्हारे अहसासों से
मेरे सीने में
शायद तुम्हारी
बंद होती आँखों से
या शायद
तुम्हारी डबडबाई
भरी आँखों से
कोई मोती गिरे
और कह जाए
की लज्जा है तुम में
तुम मुझ सा
यूँ सर-ऐ-महफ़िल
नहीं पकड़ सकते
हाथ मेरा
तब शायद मै समझ जाऊं
और ढूंड लाऊं
एकांत हमारे लिए
जहाँ तुम
और सिर्फ तुम रहो
नितांत अकेले
और समझ जाओ तुम
की तुम्हारे
मौन के आगे
कितना निरीह
निसहाय
और अकेला हूँ मैं
और कितना जरूरी है
यूँ
एक मौन स्वीकृति के लिए
निश्वास
भाव सहित
स्वीकृति का चिन्ह
जो हो
बिलकुल मौन
और मिले
शायद तुम्हारे बालों से
आँखों से
आलिंगन से
मौन रहकर
मौन कर के मुझे
मेरे प्रणय निवेदन की
मेरे जीवन के लिए
तुम्हारे प्रेम की
तुम्हारे साथ की
मौन स्वीकृति ............ ''अजीत त्रिपाठी''
ये प्रणय निवेदन
और ये करुण रुदन
तुम्हारी बेरुखी पर
यूँ मौन रहकर
स्वीकृति का भाव भी
तब दिखे
जब रूह के और पास
आ जाऊं मै
या तुम लग जाओ
छतनार सी
मेरे सीने पर
और आ जाओ
मेरी रूह के करीब
शायद तब दिख जाएँ
भाव अनकहे से
लिपटे हुए
तुम्हारे बालों से
या सिमटते हुए
तुम्हारे अहसासों से
मेरे सीने में
शायद तुम्हारी
बंद होती आँखों से
या शायद
तुम्हारी डबडबाई
भरी आँखों से
कोई मोती गिरे
और कह जाए
की लज्जा है तुम में
तुम मुझ सा
यूँ सर-ऐ-महफ़िल
नहीं पकड़ सकते
हाथ मेरा
तब शायद मै समझ जाऊं
और ढूंड लाऊं
एकांत हमारे लिए
जहाँ तुम
और सिर्फ तुम रहो
नितांत अकेले
और समझ जाओ तुम
की तुम्हारे
मौन के आगे
कितना निरीह
निसहाय
और अकेला हूँ मैं
और कितना जरूरी है
यूँ
एक मौन स्वीकृति के लिए
निश्वास
भाव सहित
स्वीकृति का चिन्ह
जो हो
बिलकुल मौन
और मिले
शायद तुम्हारे बालों से
आँखों से
आलिंगन से
मौन रहकर
मौन कर के मुझे
मेरे प्रणय निवेदन की
मेरे जीवन के लिए
तुम्हारे प्रेम की
तुम्हारे साथ की
मौन स्वीकृति ............ ''अजीत त्रिपाठी''