Sunday, October 3, 2010

निर्मम निर्वात


खामोश आँखें
बेचैन दिल ,, धड़कन रुकी हुई

एक उलझन , एक कशमकश
खुद को तलाशने की खुद में
तनहा वजूद को यादों में लपेटे

बाँहों से गिरती आरजू की लकीर
और इनसे बनता
स्वयं में स्वयं सा
स्वा निर्मित , सहृदयी
शोक संतप्त जीवन का
जीवन को जीने का तुम्हारे बिना
साँसों के बीच का
निर्मम निर्वात ,,... ''अजीत त्रिपाठी

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