Monday, December 22, 2008

दिल खोया दिल के करार में
जिंदगी बिताई उसके इन्तजार में ,,,,,,,,,

उस से मिलने का शगल था इस कदर
मिलते रहते थे ,उस खुदा के दरबार में ,,,,,,

उसकी शोखी ,,उसका हुस्न,, उसके जलवे
चली थीं गोलियां यू.पी. और बिहार में ,,,,

उसके अंदाज में वो चंचलता वो महक
सारा जहाँ खडा था उसके दीदार में ......

उसको भी है कदर मेरे प्यार की
एक तस्वीर बनाई है उसने,मेरी दीवार में ,,,,,,,

उस दिन का खौफ उसे भी सालता
होगा कितना अपनापन था, मेरी तकरार में ,,,,,,

कैसे उसे कह दूँ मै बेवफा ''अजीत''
है वो भी तो किसी के प्यार में ,,,

चलो ''अजीत'' अब कोई और जहाँ ढूँढ ले
अब नहीं हैं दिलजले तुझसे इस संसार में ,,,,,,,''अजीत त्रिपाठी ''

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