Friday, April 9, 2010

मयकदे से आया हूँ अभी



मै लौटकर मयकदे से आया हूँ अभी
तोड़कर पीने के कायदे आया हूँ अभी

तेरी याद आ गई थी पीने से पहले मुझे
छोड़कर पीने के फायदे ,आया हूँ अभी

कह दिया था सकी से आज की रात उसका हूँ
मोड़कर मुह अपने वायदे से आया हूँ अभी

लोग कहते रहे ये दवा है दर्द-ऐ-दिल की
तो तेरे नाम की भी राय दे आया हूँ अभी

''अजीत'' सुकून है की आज रंगीन होगी रात
ग़मों को अपने, अपनी हाय दे आया हूँ अभी ,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''

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