अब के बिछड़े तो फिर मिलेंगे नहीं
ये जख्म दिल के फिर सिलेंगे नहीं
सूखा रह जायेगा ये गुलिश्तां सारा
फूल खुशियों के फिर खिलेंगे नहीं
हमको याद रहेगी मुहब्बत अपनी
बस धड़कन ये फिर हिलेगी नहीं
तुम हो तो ऐतबार है हमें खुदका
तुम्हारे बिना मुहब्बत फिर करेंगे नहीं
अश्क बस बहेंगे ''अजीत'' हंसेगा
जिन्दगी में निन्दगी फिर मिलेंगी नहीं ,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
ये जख्म दिल के फिर सिलेंगे नहीं
सूखा रह जायेगा ये गुलिश्तां सारा
फूल खुशियों के फिर खिलेंगे नहीं
हमको याद रहेगी मुहब्बत अपनी
बस धड़कन ये फिर हिलेगी नहीं
तुम हो तो ऐतबार है हमें खुदका
तुम्हारे बिना मुहब्बत फिर करेंगे नहीं
अश्क बस बहेंगे ''अजीत'' हंसेगा
जिन्दगी में निन्दगी फिर मिलेंगी नहीं ,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
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