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आँखें नम के सिवा तेरा क्या हूँ मैं
एक सितम के सिवा तेरा क्या हूँ मैं
मै दूर हूँ तुझसे यकीन कर अभी इसका
एक भरम के सिवा तेरा क्या हूँ मैं
मै नासूर हूँ तेरा तू ख़ुशी समझती है
इस वहम के सिवा तेरा क्या हूँ मैं
मै खेल हूँ जिसने खेला है तेरे दिल से
इस करम के सिवा तेरा क्या हूँ मैं
कोई पूछे मेरा नाम तो रो देना तुम
आखिर ग़म के सिवा तेरा क्या हूँ मैं ,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''' [red]
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