Wednesday, March 4, 2009

बहा दी है तेरी यादों की कहानी शराब में
मिटा दी है अब डुबोकर जवानी शराब में

किसको नशा है यहाँ प्यालों से जाम से
न बची है जहाँ में तेरी कहानी शराब में

अपना क्या राख है फिजाओं में बह चले
वैसे ही जैसे मिल गया है पानी शराब

तेरा वजूद वो तेरी खुशबू वो तेरी बातें
रह न गई है तुझ बिन रवानी शराब में

आज भी पिला दे कोई तेरी कसम से मुझे
शायद बची हो तेरी कोई निशानी शराब में

तुम नहीं तो गम है किस बात का अब ''अजीत''
जिन्दगी है अपनी अब तो ,आनी- जानी शराब में ,, ''अजीत त्रिपाठी''

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