जला दिया है
वो कागज़ का पुलिंदा
जिसे कहते थे
तुम प्रेम पत्र
दिल की धड़कन
तुम्हारी छुवन
तुम्हारी तडपन
जो याद दिलाते थे
गम में मुझे
की कितना खुश थी
तुम मुझे पाकर
और अब याद दिलाते हैं
कितना उदास हूँ मै
तुम्हे खोकर
''अजीत त्रिपाठी ''
वो कागज़ का पुलिंदा
जिसे कहते थे
तुम प्रेम पत्र
दिल की धड़कन
तुम्हारी छुवन
तुम्हारी तडपन
जो याद दिलाते थे
गम में मुझे
की कितना खुश थी
तुम मुझे पाकर
और अब याद दिलाते हैं
कितना उदास हूँ मै
तुम्हे खोकर
''अजीत त्रिपाठी ''
No comments:
Post a Comment