Thursday, December 2, 2010

तुम्हे खोकर


जला दिया है
वो कागज़ का पुलिंदा
जिसे कहते थे
तुम प्रेम पत्र
दिल की धड़कन
तुम्हारी छुवन
तुम्हारी तडपन

जो याद दिलाते थे
गम में मुझे
की कितना खुश थी
तुम मुझे पाकर

और अब याद दिलाते हैं
कितना उदास हूँ मै
तुम्हे खोकर

''अजीत त्रिपाठी ''

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