Thursday, December 2, 2010

पापा ,,


पापा ,,
आपने सोचा ही नहीं
कितना दर्द होगा
आपके बिना
कितना अकेले होंगे हम
आपने सोचा ही नहीं

आज सुबह बिस्तर फिर
अजीब सी परेशानी में है

आज शाम फिर
अजीब सी हैरानी में है

कोई कह ही नहीं रहा है
शुबह उठने को जल्दी से
या शाम को
खेलने से मना करने को
पढने को

पापा
आपका हंसमुख चेहरा
वो शुबह को जाते वक्त की
हिदायतें
वो शाम को आते वक़्त की शिकायतें
हमेशा याद आती है

अब जब आप नहीं हैं
तो समझ आता है
की कितनी
जरूरी थी
आपकी डांट
आपकी फटकार

आज भाई तैयार होता है
आपकी तरह
जाने को काम पर
और याद करा जाता है
किस तरह
बरसते थे आप
माँ पर
की तैयार
क्यूँ नहीं है
कपडे और जूते अब तब तक

पापा आप बहुत याद आते हो
जब कोई कह देता है
कौन क्या करता है घर में
जैसे आज अजीत ने कह दिया
बताओ सीमा
क्या करते हैं
तुम्हारे पापा

पापा आप तो चले गए हैं
इस दुनिया के पार
पर क्या सोचा आपने
हम सभी भाई बहन हैं
आपकी निशानी
माँ को
कितने प्यारे हैं
आपकी ही तरह

फिर भी
आप क्यूँ चले गए
माँ को छोड़ कर
भगवान् के पास

जो आपको
भगवान् से भी
ज्यादा पसंद करती थी
जो आपको

भगवान् से भी बड़ा
भगवान् मानती थी ,,,,,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी;;

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