Friday, February 18, 2011

मुश्किल


मुश्किल
जायज़ है
खड़े होने में
खुद के पैरों पर

पर
सोचने वाली बात है
की
खड़े होकर
विवश समाज में
एक
भला चंगा आदमी
झुक जाता है
घुटनों के बल
लेट जाता है
पेट जमीं पर रख
और
रखकर सर
किसी दबंग के
कदमो पर
सजा पाकर
स्वाभिमान से
खड़े होने की ,,,,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''

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