Sunday, May 8, 2011

क्यूँ पूछते हो कौन हो


इस तरह क्यूँ मौन हो ,,
क्यूँ पूछते हो कौन हो

मन निछावर तुम पे है
तन पे तेरा नाम है
और ये जीवन भी मेरा
सिर्फ तेरे नाम है

आज तुझ पे वार दूँ
कल भी तुझको प्यार दूँ
तोड़कर मै रश्म सारी
आ नया संसार दूँ

व्यर्थ की चिंता तुझे है
व्यर्थ ही परेशान है
मै तेरे आगोश में हूँ
तू मेरा भगवान् है

क्यूँ भला तू रो रही है
क्यूँ ये आँहों का सिला
रख ले मुझे आँख में
साँसों से साँसें मिला

जब कभी कोई बात हो
सूनी सूनी रात हो
याद करना तुम मुझे
जब आँख से बरसात हो

मै हूँ तत्पर हर समय
हर घडी हर पल यहाँ
जो भी कहना हो कहो
चाहे यहाँ चाहे वहां

बस याद भर इतना रखो
ना पूछना मै कौन हूँ

मै कुछ नहीं तेरे बिना
तेरे सिवा कुछ भी नहीं
बस इसलिए मै मौन हूँ
मत पूछ की मै कौन हूँ ,,,,,,,,,,,, अजीत त्रिपाठी '''

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