अगर तुम सी नहीं तो मोहबत किस काम की
अगर तुम्हारे साथ नहीं तो संगत किस काम की
कोई खुशबू नहीं होती गुलाब में भी मेरे यहाँ
गर तेरे पहलू में नहीं तो सोहबत किस काम की
किसी की आरजू ,हर्ज़ है, जो कर ले कोई यहाँ
गर तेरी ही नहीं, तो जुस्तजू किस काम की
मयकदे की मस्ती, तेरे होंठो की तपिश जैसी
गर वो भी नहीं हो ,तो मयकशी किस काम की
जिन्दगी की गली तेरे बालों सी घनी होनी है
गर हस्ती तू नहीं तो जिन्दगी किस काम की
''अजीत'' दिल लगाना शौक हो या महज ख्याल
दिल लगी तुझसे नहीं तो दिल्लगी किस काम की ,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
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