Monday, May 2, 2011

मोहबत किस काम की

अगर तुम सी नहीं तो मोहबत किस काम की
अगर तुम्हारे साथ नहीं तो संगत किस काम की

कोई खुशबू नहीं होती गुलाब में भी मेरे यहाँ
गर तेरे पहलू में नहीं तो सोहबत किस काम की

किसी की आरजू ,हर्ज़ है, जो कर ले कोई यहाँ
गर तेरी ही नहीं, तो जुस्तजू किस काम की

मयकदे की मस्ती, तेरे होंठो की तपिश जैसी
गर वो भी नहीं हो ,तो मयकशी किस काम की

जिन्दगी की गली तेरे बालों सी घनी होनी है
गर हस्ती तू नहीं तो जिन्दगी किस काम की

''अजीत'' दिल लगाना शौक हो या महज ख्याल
दिल लगी तुझसे नहीं तो दिल्लगी किस काम की ,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''

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