किसी से प्यार करते हो
जिन्दगी खराब करते हो
आँखों ही आँखों में देखो
शरबत-ऐ-शराब करते हो
रोज देखते हो आसमां में
आफ़ताब, माहताब करते हो
छिपे रहते हो बाँहों में उनकी
खुद को गुलाब करते हो
''अजीत' बेमानी है जिन्दगी
उन्हें क्यूँ नाराज करते हो ,,,,,,,,,,,,,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''
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