Monday, May 2, 2011

तुम्हारे इन्तजार में


अगर
कर सको मेरे लिए तो
रुक जाना
वहीँ
जहाँ पर
मैंने
एक उम्र गुजारी है
इस इन्तजार में की
तुम कहोगे आकर
की नहीं बन सकते मेरे
कहीं और है वो
जो मन में है तुम्हारे
किसी और के हो तुम

और इसीलिए जा रहे हो
तुम मेरी जिन्दगी से
दूर बहुत दूर

सुनो कभी मिले वक़्त
तो कह देना
फकत इतना ही
उस जगह से
जहाँ गुजारी है
मैंने एक उम्र
तुम्हारे इन्तजार में, ,,,,,, ''अजीत त्रिपाठी ''

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