Sunday, September 5, 2010

आज फिर




आज फिर

कुछ सपने टूटे हैं
कुछ अपने रूठें है
कुछ नमी है आँखों में
कुछ कमी हैं बातों में

आज फिर
रात रोती रही
बात होती रही
कुछ ख्वाब अलग से आये थे
कुछ याद हमें वो आये थे

आज फिर
दिन गुजरता नहीं
सफ़र कटता नहीं
कुछ रंज-ओ-गम हैं सीने में
कुछ मुश्किल सी है जीने में

आज फिर
कोई हिचकी नहीं
किसी की सिसकी नहीं
कुछ दूर दूर से रह गए हम
कुछ मजबूर से रह गए हम

आज फिर
मोहब्बत परेशान सी ही
वफ़ा नादान सी है
कुछ है शायद इस दिल में भी
कुछ तेरा है इस दिल में भी

आज फिर
ऐसे ही गुजर गया सब
जो अपना है पर अपना नहीं
कुछ जो तुम्हे कहना था
कुछ जो तुमसे सुनना था

आज फिर
एक नाकाम सी कोशिश है
तुम्हे याद करने की
की शायद आये तुम्हे
कोई हिचकी
और तुम यकीन करो
वो मेरे कारन है
बस याद किये जा रहा हूँ
की शायद तुम्हे याद आऊं
वैसे ही जैसे याद आता था कभी

वैसे ही
याद आऊं
तुम्हे
आज फिर ,,, ''अजीत त्रिपाठी ''

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