कब तलक यूँ याद और ,,कब तलक फ़रियाद हों
तुम नहीं हो पास तो , क्यूँ सनम बरबाद हों
क्यूँ गिरफ्तें यूँ मोहब्बत ,, की हमें हासिल रहें
अब जरा हम सांस लें की ,, फैसले आज़ाद हों
बेईमानी आशिकी और ,, बेवजह ज़ज्बात ये
हम रहे ना तुम रहे , क्यूँ यूँ ही नाशाद हों
हम गरीबों के हवाले , कब कहाँ एक नूर है
फिर नसीबों में यूँ ही , कुछ हौसले ईजाद हों
बात मानो या ना मानो 'अजीत' मोहब्बत क्या करना
और भी मसले बहुत ,, क्यूँ ऐसे ही बरबाद हों ......... ''अजीत त्रिपाठी''
तुम नहीं हो पास तो , क्यूँ सनम बरबाद हों
क्यूँ गिरफ्तें यूँ मोहब्बत ,, की हमें हासिल रहें
अब जरा हम सांस लें की ,, फैसले आज़ाद हों
बेईमानी आशिकी और ,, बेवजह ज़ज्बात ये
हम रहे ना तुम रहे , क्यूँ यूँ ही नाशाद हों
हम गरीबों के हवाले , कब कहाँ एक नूर है
फिर नसीबों में यूँ ही , कुछ हौसले ईजाद हों
बात मानो या ना मानो 'अजीत' मोहब्बत क्या करना
और भी मसले बहुत ,, क्यूँ ऐसे ही बरबाद हों ......... ''अजीत त्रिपाठी''
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