Sunday, September 5, 2010

किसी के साथ


यूँ भी अजब जिन्दगी में खैरात मिली है
की मोहब्बत में जीने को एक रात मिली है

अजब हाल है की आशिकी खामोश बहुत है
और कहने को दिल की हर बात मिली है

मै मुकम्मल इश्क नहीं , पर्दा हूँ वफाओं का
न रोऊँ न हंसू ये अजब सौगात मिली है

वो मिलती है पर मिल के भी मिलती नहीं
जब भी मिली वो, किसी के साथ मिली है

मै मायूस नहीं ,ग़मज़दा भी नहीं हूँ ''अजीत''
ये बात भी क्या कम की ये रात मिली है ................ ''अजीत त्रिपाठी''

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