Sunday, September 5, 2010

सवर गया होगा


चांदनी रात में वो और सवर गया होगा
प्यार है दिल में धीरे से उतर गया होगा

मधुर मोहक है सम्मोहक इस कदर
छा गया होगा जिधर गया होगा

वो जिसके नूर से रोशन है जहाँ
आज चाँद पर वो भ्रमर गया होगा

वो जिसके दीद से सवरती है जिन्दगी
आज आईने में देख खुद तर गया होगा

वो शमा है जो दिल की धड़कन है
जला जो परवाना आज मर गया होगा

कोई कहाँ है तुझसा महफ़िल में यहाँ
मेरा , मै , जाने किधर गया होगा

न उदास हो महफ़िल तुझसे ही रहेंगी
ग़ज़लें''अजीत' तेरे नाम कर गया होगा ..''अजीत त्रिपाठी''

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