कल शाम से ही
झगड़ रही हो
की क्या सोचता रहता हूँ
तुम्हारे सिवा
ऐसे ही
अकेले मैं बैठकर
और मै थक गया हूँ
बताते बताते
की कुछ नहीं
तुम्हारे सिवा
समझा करो
और क्या है
जिसे सीने से लगाकर
ख़ुशी की तरह
दर्द में भी हंसने की वजह जैसा
समझ सकूँ मै
तुम्हारे सिवा
देखो
सुन लो
जो लड़ रही हो ना इस तरह शाम से ही
तो कल रात
ख्वाब में भी नहीं आई तुम
वजह तुम ही हो
,,
मैंने तो देखा है
अपने अंतर्मन में
हमेशा
तुम्हे ही
मुस्कुराते हुए
तो
तुम ही बताओ
कैसे आओगी
मेरे ख़्वाबों में
जबकि तुम
कल शाम से ही
झगड़ रही हो ,,,,,,, '' अजीत त्रिपाठी ''
झगड़ रही हो
की क्या सोचता रहता हूँ
तुम्हारे सिवा
ऐसे ही
अकेले मैं बैठकर
और मै थक गया हूँ
बताते बताते
की कुछ नहीं
तुम्हारे सिवा
समझा करो
और क्या है
जिसे सीने से लगाकर
ख़ुशी की तरह
दर्द में भी हंसने की वजह जैसा
समझ सकूँ मै
तुम्हारे सिवा
देखो
सुन लो
जो लड़ रही हो ना इस तरह शाम से ही
तो कल रात
ख्वाब में भी नहीं आई तुम
वजह तुम ही हो
,,
मैंने तो देखा है
अपने अंतर्मन में
हमेशा
तुम्हे ही
मुस्कुराते हुए
तो
तुम ही बताओ
कैसे आओगी
मेरे ख़्वाबों में
जबकि तुम
कल शाम से ही
झगड़ रही हो ,,,,,,, '' अजीत त्रिपाठी ''